सामने आने लगे हैं अतिरिक्त लोडिंग के परिणाम बता रही है पूर्व एमई की निरीक्षण रिपोर्ट

मुंबई : सीसी प्लस 8 प्लस 2 टन और 25 टन एक्सेल लोड ट्रेनों की अतिरिक्त लोडिंग की अनुमति के दुष्परिणाम अब सामने आने लगे हैं. हालांकि यह दुष्परिणाम त्वरित प्रभाव से सामने आ गए थे, जब इसकी अनुमति दी गई थी. परंतु तब रिकार्ड में यह बातें दर्ज नहीं थीं. अब बाकायदा इन दुष्परिणामों को रिकार्ड किया गया है. जो कि पूर्व मेंबर इंजीनियरिंग (एमई) श्री एस. के. विज द्वारा 5 फरवरी 2009 को पूर्व एवं दक्षिण पूर्व रेलवे, कोलकाता के निरीक्षण दौरे की रिपोर्ट से स्पष्ट है. लालू की ‘मैनेज नीतियां’ भारतीय रेल का बंटाधार कर रही हैं. यह बात अब सही साबित हो रही है और अब यह भा.रे. के रिकार्ड में भी दर्ज हो रही है. लालू के जाते ही अभी तो उनकी मैनेज नीतियों का आगाज होना शुरू हुआ है. अभी तो उनके मैनेज आंकड़ों की पोल भी खुलेगी. जो कि उन्होंने पूरे दंभ के साथ भारतीय रेल का कथित कायाकल्प कर देने के बारे में कहा था. इसके साथ ही इस बात की भी पोलें खुलेंगी कि उन्होंने और उनके लोगों ने पिछले पांच वर्षों में भा.रे. को किस-किस तरह से लूटा…?
खैर, फिलहाल बात हो रही है श्री एस. के. विज के निरीक्षण रिपोर्ट की. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सीसी प्लस 8 प्लस 2 टन लोडिंग और 25 टन एक्सेल लोड वाली ट्रेनों की अनुमति दिए जाने से यह तो सही है कि रेलवे के आय में वृद्धि हुई है. इसके अलावा भी व्यवस्थित व्यवस्था और हायर स्पीड से इसमें कुछ और वृद्धि संभव हो सकती है. परंतु इसके चलते रोलिंग स्टाक, ट्रेक और ब्रिजों का जो भारी नुकसान हो रहा है, वह अत्यंत चिंता का विषय है. इसके अलावा अतिरिक्त लोडिंग पर सतत नजर रखने की अवश्यकता है.
ध्यान रहे ‘रेलवे समाचार’ ने पहले ही लिखा है कि अतिरिक्त अनुमति के अलावा भी अतिरिक्त लोडिंग जारी है और जो अतिरिक्त लोडिंग की अनुमति दी गई है, वह वास्तव में ‘ओवर लोडिंग’ के रूप में पहले से ही जारी थी. मगर जीएम कांफ्रेंसों में इंजीनियरिंग और मैकेनिकल विभागों के उच्च अधिकारियों की कड़ी आपत्तियों के मद्देनजर तब इन पर कुछ अंकुश रहता था. उसी ‘ओवर लोडिंग’ को सीसी प्लस फोर प्लस एट प्लस टू टन में बदला गया था, परंतु इसके बावजूद पहले से चल रही उक्त ‘ओवर लोडिंग’ ‘अतिरिक्त’ के भी ‘अतिरिक्त’ हो गई है, जिसके दोहरे दुष्परिणाम अब सामने हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अतिरिक्त के अलावा ‘अतिरिक्त’ (ओवर) लोडिंग पर सतत नजर (क्लोज विजिलेंस) रखे जाने की आवश्यकता है क्योंकि बड़ी संख्या में वैगन बियरिंग्स के टूटने/फेल होने के मामले सामने आ रहे हैं. इसके अलावा इंजनों की ट्रेक्शन मोटरों के बड़ी मात्रा में फेल होने के मामले हो रहे हैं. इनकी संख्या भी लगातार बढ़ रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि एडिशनल डायनामिक लोड्स और अन्य प्रकार के डैमेज के कारण ट्रेक्शन मोटरों में आंतरिक खराबी और उनके फेल होने तथा व्हील्स (पहियों) में पड़ रही दरारों की वजह से ट्रेक और ब्रिज बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रहे हैं. इन पर गंभीरतापूर्वक ध्यान दिए जाने की जरूरत है. क्योंकि भा.रे. का वर्तमान ढांचा एवं इसकी आंतरिक संरचना तथा रोलिंग स्टॉक फिलहाल अतिरिक्त बोझ वहन करने की स्थिति में नहीं है. पूर्व एमई ने उपरोक्त तथ्यात्मक ज्ञान सभी जोनों के प्रिंसिपल चीफ इंजीनियरों को दिया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में हालांकि सिगनल डिपार्टमेंट ने काफी बेहतर काम किया है, परंतु ट्रेन ऑपरेशंस को और विश्वसनीय बनाने के लिए इसमें अभी और ज्यादा सुधार की जरूरत है. रिपोर्ट में कहा गया है कि संरचनात्मक विकास के साथ ही मानव संसाधन के भी सतत विकास की आवश्यकता है. यह एक आधारभूत जरूरत है और अत्यंत आवश्यक किस्म की जरूरत है, क्योंकि जो भी परिसंपत्तियां हैं, उनके सुरक्षित रखरखाव के लिए पर्याप्त मानव संसाधन का होना जरूरी है. रेलवे को अपने प्रशिक्षित एवं योग्य कार्मिकों को न सिर्फ अपने पास रोके रखने की जरूरत है बल्कि इस मानव संसाधन में लगातार विकास करते रहने की आवश्कता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जूनियर स्केल कैडर स्ट्रेंथ कंस्ट्रक्शन में तीन गुना और ओपन लाइन में न्यूनतम दो गुना बढ़ाई जानी चाहिए. इसके साथ ही वर्तमान से कम से कम दो गुना स्ट्रेंथ सीनियर स्केल में बढ़ाई जानी चाहिए.
रिपोर्ट में सभी पीसीई को निर्देश दिया गया है कि रोड ओवर ब्रिजेज की ओपनिंग के साथ ही लेवल क्रासिंग गेटों को तुरंत बंद कर दिया जाए. यदि जरूरत हो तो हल्के वाहनों के लिए आरओबी के निर्माण के साथ ही अंडरपास बनाया जाए, मगर इसकी बजटिंग भी प्लानिंग स्तर पर ही कर ली जानी चाहिए.
पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक श्री दीपक कृष्ण ने अपने सभी पीएचओडी’ज से कहा कि वे ऑपरेटिंग रेशियो को नीचे लाने/कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं. एफए एंड सीएओ/पू.रे. ने कहा कि पू.रे. के उच्च ऑपरेटिंग रेशियो के तीन प्रमुख कारण हैं. इनमें पहला है कि इस रेलवे में तीन वर्कशॉप हैं. दूसरे वैगन टर्न एराउंड का कम होना जो कि स्पीड बढ़ाने से कवर किया जा सकता है तथा तीसरा कारण पू.रे. में शार्ट लीड के कारण आवश्यक अर्निंग कम दिखती है, जबकि ओरिजनेटिंग अर्निंग काफी ज्यादा है. पूर्व रेलवे में इंजी. विभाग में पदों का सृजन करते समय ट्रेकमैनों की कुछ पोस्टों के सरेंडर के लिए सीपीओ का कहा गया. सीपीओ ने बताया कि इस संदर्भ में रेलवे बोर्ड ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं.

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