Archive for Railway Board

Railways to consider jobs to children in lieu of VRS

Job in lieu of VRS

Making the safety-related voluntary retirement scheme (VRS) more lucrative, Railways today said it is considering a move to provide employment to the ward of an employee availing the scheme as well as relaxing the age limit under it.

At present, the scheme is available to only gangmen in group D and drivers in group C attaining the age of 55 to 57 years.

Under the new proposal, the scheme will be extended to all safety category staff like pointsmen, khalasi and others.

The age limit will be reduced to 50 years and a ward of the staff will get employment on availing the scheme.

We are considering the move to provide employment to the ward of a railway employee availing the scheme,” Railway Minister Mamata Banerjee said attending a All India Running staff Conference organized by All India Railwaymen’s Federation today on 13 July, 2010 at New Delhi

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Shri Vivek Sahai has taken over as the new Chairman, Railway Board

Shri Vivek Sahai has taken over as the new Chairman, Railway Board

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Shri Vivek Sahai takes over as Chairman, Railway Board, in New Delhi on May 31, 2010.

Shri Vivek Sahai has taken over as the new Chairman, Railway Board and ex-officio Principal Secretary to the Government of India, Ministry of Railways, here today. He replaces Shri S.S.Khurana who superannuated today from this post. Prior to this Shri Sahai has been holding the post of Member (Traffic), Railway Board since 28th December 2009.
Shri Sahai , an IRTS Officer of 1973 batch, has held several key posts on Indian Railways, such as General Manager, Northern Railway, General Manager North Central Railway, Additional Member Traffic, Railway Board, Chief Operations Manager, Western Railway, Divisional Railway Manager, Mumbai, Central Railway, Chief Freight Transportation Manager, Western Railway, Executive Director, Railway Board, New Delhi, Chief Operations Manager, Konkan Railway Corporation Limited. He also has extensive experience in suburban train operations in Mumbai, having worked as Divisional Railway Manager, Mumbai Division of Central Railway and Addl. General Manager, Western Railway where he also handled the aftermath of serial bomb blasts.
Shri Sahai holds a post graduate degree in Science (Physics) from Allahabad University. He has been trained in US Rail Roads & SNCF (French Railways) under UNDP Project in the year 1989. He was also part of an Indian delegation which was sent to study the privatization of British Railways in 1996. He has also participated in advanced leadership programme held at Stern Business School, New York, USA in 2007.

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Organisation Structure of Indian Railway Visit: http://LTRSNRMU.blogspot.com/

Minister for Railways   – Mamata Banerjee

Email ID – mr@rb.railnet.gov.in

 

Minister of State for Railways – K. H. Muniyappa

Email ID – msrm@rb.railnet.gov.in

 

Minister of State for Railways – E. Ahamed

Email ID – msra@rb.railnet.gov.in

 

 

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A seven step Staff Grievances procedure on Indian Railways – NRMU

A seven step Staff Grievances procedure on Indian Railways

7step Grievances procedure

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All 20 RRB Chairmen changed by MAMATA, in a doubt that they are LALU’s men

सभी आरआरबी चेयरमैनों को एकसाथ हटाना बेहद विवादस्पद निर्णय

आखिर रेलमंत्री सुश्री ममता बनर्जी ने सभी २० आरआरबी चेयरमैनों को एकसाथ हटाने का आदेश ५ नवम्बर को जारी कर दिया. रेलमंत्री का यह निर्णय एक बेहद क्रूर और विवादास्पद निर्णय माना जा रहा है. जबकि होना तो यह चाहिए था कि यदि उन्हें इन चेयरमैनों को हटाना ही था तो सर्वप्रथम उन्हें हटाया जाता जिनका कार्यकाल पूरा हो गया था, फिर इसके बाद दूसरी लात में उन्हें हटाया जाता जिनका कार्यकाल पूरा होने वाला था. इस प्रकार इस मिड टर्म में इन अधिकारियों के बच्चों कि पढाई बर्बाद होने से बच जाती. क्योंकि इन अधिकारियों में अधिकाँश को तो अभी आरआरबी में पदस्थ हुए एक साल भी नहीं पूरा हुआ था.
इसके अलावा इन अधिकारियों का यह असमय ट्रान्सफर किसी भी नियम – कानून के अनुरूप भी नहीं है. सिर्फ इस आशंका या आरोप के चलते इन सभी अधिकारियों को एकसाथ हटा देना कतई उचित नहीं कहा जा सकता कि ये सब पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव के आदमी थे. अब यदि इनमें से कोई एक भी अधिकारी रेलमंत्री के इस क्रूर निर्णय को थोड़ी सी हिम्मत दिखाकर अदालत में चुनौती दे दे तो रेल मंत्रालय को लेने के देने पड़ सकते हैं.
हमारे विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि इस सब कारगुजारी के पीछे त्रिन मूल कांग्रेस के एक सांसद मुकुल राय का हाथ है. सबसे पहले उन्होंने ईडी/आरआरबी के पद से श्री आनंद माथुर को हटवाया जो कि इस पद पर अभी मुश्किल से ६ महीने पहले ही पदस्थ हुए थे. अब इस पद पर जिन्हें लाया गया है एक तो वह स्टोर सर्विस के हैं दूसरे उनकी छवि भी बहुत अच्छी नहीं बताई जाती है. इसके अलावा नए पदस्थ किये गए चेयरमैनों में आईआरपीएस सर्विस के मात्र ३ अधिकारियों को ही लिया गया है जबकि इससे पहले जो निर्णय हुआ था इसके अनुसार आरआरबी चेयरमैनों के पद पर ज्यादातर आईआरपीएस सर्विस के अधिकारियों को ही पदस्थ किया जाना था.
इससे पहले जब १९ अक्तूबर को १८ आरआरबी चेयरमैनों को शिफ्ट करने कि फाइल मूव कि गयी थी तब ‘रेलवे समाचार’ ने इस बारे में सीआरबी सहित सेक्रेटरी/रेलवे बोर्ड और सभी बोर्ड मेम्बरों को मोबाइल सन्देश भेजकर ऐसा कोई विवादास्पद निर्णय न लेने तथा उपरोक्त तरीके से चेयरमैनों को हटाने के बारे में अविलम्ब रेलमंत्री के संज्ञान में यह मामला लाये जाने के लिए सभी बोर्ड मेम्बरों को अवगत कराया था। जिसके परिणाम स्वरुप तब यह मामला स्थगित कर दिया गया था. ५ अक्तूबर को जिस दिन यह फाइल पुनः रेलमंत्री के एपीएस श्री गौतम सान्याल को भेजी गयी थी उस दिन भी ‘रेलवे समाचार’ ने ऐसा ही एक सन्देश भेजकर सभी बोर्ड मेम्बरों को अवगत कराया था. मगर जिनकी इस मामले में सबसे ज्यादा जिम्मेदारी बनती है जब वह मेंबर स्टाफ स्वयं मेंबर ट्रेफिक बनने के ख्वाब में अपनी सारी हड्डियों को दोहरा करते हुए साष्टांग हुए जा रहे हों तब सिस्टम को चौपट होने से कौन बचा सकता है?
सुश्री ममता बनर्जी ने रेलमंत्री का पद ग्रहण करने के तुंरत बाद मीडिया को दिए गए अपने पहले बयान में कहा था कि वह रेलवे बोर्ड का पुनर्गठन करेंगी और सीआरबी तथा सेक्रेटरी, रेलवे बोर्ड को भी हटा सकती हैं. इनमें से वह किसी को भी नहीं हटा पायीं, क्योंकि सीआरबी पर पीएमओ का और सेक्रेटरी पर लालू का ठप्पा लगा हुआ है. जबकि सेक्रेटरी/रेलवे बोर्ड के पद पर बैठा अधिकारी न सिर्फ कई अधिकारियों से जूनियर है बल्कि महाभ्रष्ट भी है, इस बात से न सिर्फ सभी रेल अधिकारी वाकिफ हैं बल्कि स्वयं रेलमंत्री भी अब इस तथ्य से भली – भांति अवगत हैं. इससे पहले ‘रेलवे समाचार’ भी सेक्रेटरी के भ्रष्टाचार और उनका लालू का पिट्ठू होने के सारे तथ्य विस्तार से प्रकाशित कर चुका है.
रेलमंत्री ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल की अपनी राजनीति से फुर्सत नहीं है जबकि बोर्ड में पदस्थ उनके तमाम सिपहसालार रेलवे की तमाम तकनीकी कार्य प्रणाली से नावाकिफ हैं. तथापि सुश्री ममता बनर्जी रेल मंत्रालय को पार्ट टाइम ही चलाना चाहती हैं, जो कि नामुमकिन है. इसलिए यदि चारों तरफ लगातार रेल दुर्घटनाएं हो रही हैं और इससे सुश्री ममता बनर्जी की ‘क्षणिक बुद्धि’ छवि और भी ज्यादा ख़राब हो रही है तो उसका दोष स्वयं ममता बनर्जी पर ही जा रहा है. रेलमंत्री का अपने रेल मंत्रालय की तरफ ध्यान न देने का ही परिणाम है की रेलवे में चारों तरफ भ्रष्टाचार का बोलबाला हो रहा है.– रेलवे समाचार

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CBI will conduct criminal enquiry of Railway Accidents. GM, DRM & Branch Officers may held Responsible- Railsamachar

रेल अधिकारी अपना ‘कट’ लेना बंद करें-रेलमंत्री
  • रेल अधिकारी ‘क्लब कल्चर’ छोडें
  • रेल दुर्घटनाओं की सीबीआई से आपराधिक जाँच कराई जायेगी
  • दुर्घटनाओं के लिए जीएम, डीआरएम् और ब्रांच अफसरों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा

नई दिल्ली : मथुरा में हुई दो ट्रेनों की दहशतनाक टक्कर के तुंरत बाद ठाणे, मुंबई में २३ अक्तूबर को ट्रैक के ऊपर पुल का गर्डर/pa[plaa[na गिरने saoहुई दर्दनाक घटना और लगातार ३०-३५ घंटों तक सभी ट्रेनों के बंद रहे आवागमन से मुंबई के लाखों दैनिक रेल यात्रियों की परेशानी को देखकर और शायद इससे होने वाली अपनी भारी आलोचना से बचने के मद्देनजर रेलमंत्री सुश्री ममता बनर्जी ने २३ अक्तूबर को ही आनन – फानन रेलवे बोर्ड पहुंचकर पुरे बोर्ड की इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर सभी अधिकारियों की लम्बी खिंचाई का डाली।
सूत्रों का कहना है की ममता ने अधिकारियों को सामानों की खरीद और आउट सोर्सिंग तथा टेंडर सिस्टम में अपनी कमीशनखोरी खत्म करने को कहा है। सूत्रों का तो यहाँ तक कहना है की ममता ने इसके लिए वास्तव में ‘कट’ जैसे टपोरियों की भाषा के शब्द का साफ़ इस्तेमाल किया जिससे ईमानदार अफसरों के होठों पर भी मुस्कराहट उभर आई, यह देखकर रेलमंत्री भी उनका मंतव्य समझकर हलके से मुस्कराए बिना नहीं रह सकीं।
रेलमंत्री के आदेश पर एक तरफ़ पैलेस ऑन व्हील्स का मजा ले रहे दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक श्री ए.के.जैन को उनकी छुट्टियाँ रद्द करके तुंरत वापस बुलाया गया तो दूसरी तरफ़ उनके और लालू के सबसे बड़े सिपहसालार रहे सीऍफ़टीएम्/द.पू.रे.श्री बी.डी.राय, जो की इस पड़ पर पिछले करीब ५ सालों से बिराजमान थे, को तुंरत प्रभाव से इस पद से हटा दिया गया है जिससे तमाम अफसरों के कलेजे को काफी ठंढक मिली है क्योंकि लालू वरदहस्त होने के कारण श्री राय अपनी मनमानियों के चलते बहुतों को अपना दुश्मन बना लिए थे।
उधर मथुरा के पास हुई ट्रेनों की टक्कर और उसमें दो दर्जन से ज्यादा मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराकर ममता ने आगरा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री के.जी.त्रिपाठी को उनके पद से हटा देने का आदेश दिया है।
२३ अक्तूबर की इमरजेंसी बोर्ड मीटिंग में बताते हैं की रेलमंत्री ने न सिर्फ़ रेल अधिकारियों की सभी विदेश यात्राओं पर अगले एक साल तक के लिए प्रतिबन्ध लगा दिया है बल्कि पिछले ५ वर्षों के दरम्यान जितने भी फ्रेट रेकों का एलाटमेंट हुआ है सभी की जाँच सीबीआई से कराने को कहा है। सूत्रों का कहना है की रेलमंत्री ने आउट ऑफ़ टर्न रेक एलाटमेंट की गलत परंपरा को तुंरत प्रभाव से रोक देने को कहा है.

rola samaacaar

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Classification of posts as Selection/Non-Selection; status of promotions betn 01.01.2006 & 01.09.2008 in merged grades

No.AIRF/405(VI CPC)                                    Dated: 14/09/2009

AIRF/341

 

The Secretary (E),

Railway Board,

New Delhi

Dear Sir,

Sub: Classification of non-gazetted posts as Selection/Non-Selection; consequent to the revision of pay structure as recommended by the 6th Central Pay Commission – status of promotions made between 01.01.2006 and 01.09.2008 within merged grades

Ref: Rly. Board’s letter No. E (NG)I-2008/PM1/15 dated 28.08.2009

Taking all the factors, enumerated in the Board’s letter, into consideration, AIRF is of the view that the staff duly promoted between the period 01.01.2006 to 30.08.2008 after observing all the relevant rules and procedures then prevailing should be allowed to enjoy the same. However, such staff may be allowed to opt either to retain promotion or to forgo the same by an act of positive option within a period of 3 months of such notification.

In the event of exercising option to come-over to VI CPC, such of the pay from a later date than 01.01.2006, payment already made as arrear should be allowed as such i.e. if, any over payment has already been made on the account of fixation of pay in the revised scale w.e.f. 01.01.2006, the same should be waived seeking relaxation of Rule 5 of RSRP in this regard as per power vested with the Government under Rule 16 of RSRP.

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Copy to: General Secretaries, all affiliated unions – for information.

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